Bhagwadagya se avataran

सागर के मध्य में तीन सिद्ध – सनत, सनंदन और सनतकुमार – तपस्या कर रहे थे| उस समय आकाशवाणी हुई कि आपमें से एक सिद्ध भवसागर मे जीवन निस्तारण हेतु जाएं:

सागर मे टापू तामे, तीन सिद्ध ध्यान धरे|

एक को जु आज्ञा हुई, जीव निस्तारिए||

निजानंद निज ब्रह्म अपारा, तिनकी आज्ञा सों तन धारा|

सब जीवन कि पूरी आशा, भक्ति हेत हरि कियो विलासा||

शब्द बंधाने शाह के ताथें दादू आये|

दुनिया जीवी बापुडी सुख दर्शन पाए||

(जन्मलीला – जनगोपाल जी कृत)